चपरासी ने खड़ी की 4700 करोड़ की कंपनी - Fevicol man Biography in hindi

आज हम Motivational Story Hindi में लाये है ऐसे आदमी की कहानी जिसने अपना घर चलाने के लिए चपरासी की नौकरी की लेकिन अपनी नापसंद Profession का काम नहीं किया। और फिर Business भी किया तो ऐसा किया जो जनता की समस्या का समाधान निकाले, और कहते है ना सबसे भले के लिए किया गया काम करेंगे तो आपको सफल होने से कोई रोक नहीं सकता है। हुआ भी वहीं कभी Peon की नौकरी करने वाले ने 4700 करोड़ का साम्राज्य खड़ा कर दिया और जिसका प्रोडक्ट आज भारत के हर घर में इस्तेमाल होता है।

Balvant parekh Success story in Hindi. Founder of pidilite Industries.
Balwant Parekh Biography in Hindi
बलवंत पारेख का जन्म 1925 में गुजरात राज्य मे भावनगर जिले के महुआ गांव मे हुआ। बलवंत ने शुरूआती शिक्षा अपने पास के सरकारी स्कूल से पुरी की और आगे पढने के लिए वे Mumbai गये। बलवंत के पिता बलवंत को एक बड़ा Lawyer बनाना चाहते थे क्योंकि बलवंत के दादा भी एक Lawyer थे। इसलिए मुम्बई आकर बलवंत पारेख ने मुम्बई के सरकारी लॉ कालेज से Law की पढाई की। Law की डिग्री के दौरान ही बलवंत पारेख की शादी कांता बेन नामक लड़की से हो गई थी। इसके बाद बलवंत पोरख ने वकालात की डिग्री हासिल कि लेकिन यह डिग्री बलवंत ने सिर्फ अपने माता-पिता के दबाव डालने पर हासिल की थी। बलवंत एक सिद्धान्तवादी और अपने देश से प्रेम करने वाले व्यक्ति थे। और वकालात का पेशा तो आपको पता ही है ऐसे सिद्धान्तवादी व्यक्ति के लिए ये पेशा कितना मुश्किल था।

बलवंत का हमेशा अपना बिजनेस करने का मन था। लेकिन माता-पिता Business के बजाय वकालात ज्यादा पसंद थी। इसलिए बलवंत ने मुम्बई में अपना घर चलाने के लिए एक Printing-Press पर छोटी सी नौकरी कर ली। लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया कि बलवंत को एक लकड़ी के व्यापारी के यहां बतौर चपरासी नौकरी करने पड़ी और उस वक्त वे उसी लकड़ी व्यापारी के Godown में अपनी पत्नी के साथ रहते थे। बलवंत के लिए यह समय काफी मुश्किल था। उसी दौरान बलवंत की मुलाकात एक मोहन नाम के भले आदमी से हुई कुछ ही समय बाद दोनो दोस्त बने गये और जल्द ही दोनो ने व्यापार शुरू कर दिया। वे शुरूआत में साईकिल और सुपारी विदेशों से मंगाकर भारत में बेचा करते थे। उस समय भारत ही हुआ था और शुरूआती समय में था और कुछ लोग विदेशों से जो चीजे मंगाई जाती थी उन्हे भारत में ही बनाने की Planning कर रहे थे।

ऐसे ही समय में लकड़ी के कारीगरों को देखकर बलवंत के मन में भी एक आईडिया आया। उन्होने देखा कि कुछ कारीगर लकड़ी को जोड़ने के लिए सरेस का उपयोग कर रहे है लेकिन इसमें कई तकलीफे है जैसे सरेस जानवर की चर्बी से तैयार किया जाता था। उपयोग में लेने से पहले इसको काफी गर्म करना होता था साथ ही गर्म करते समय इसमें भयंकर बदबु आती थी। इन्ही सब समस्याओं के निराकरण के लिए बलवंत अपने रिसर्च में लग गये।

और कुछ ही समय बाद उन्होने सिथेटिक रसायन के उपयोग से एक खुशबूदार सफेद गोंद बना लिया जो लकड़ी चिपकाने का काम करता था। इसका नाम रखा उन्होने Fevicol । इससे पहल बाजार में मोविकौल नाम का ब्राण्ड चलता था। लेकिन वो काफी मंहगा था और भारत में वह आसानी से मिलता भी नहीं था। बस सही से शुरूआत हुई Fevicol की। Fevicol दो शब्दो को मिलकार बना है। और इसमे कोल का मतलब होता है दो चीजो को जोड़ने वाला और यह एक जर्मनी शब्द है।

बस फिर क्या वो कहते है नो देश और समाज हित को ध्यान में रखकर किया गया काम कभी असफल नहीं होता है। और ऐसा ही Fevicol के साथ भी हुआ देखते ही देखते Fevicol मुम्बई के बाद पुरे देश में प्रसिद्ध हो गया। और बलवंत पारेख ने भी इस को देखते हुए अन्य कई प्रोडक्ट भी बाजार में उतार दिये। जिसने Fevikwik, M-seal, Dr. Fixit के अलावा और बहुत सारे प्रोडक्ट आज बाजार में उपलब्ध है। इसके अलावा कम्पनी लगभग 200 छोटे बडे उत्पाद है और लगभग 20000 लोगों को Pidilite कम्पनी ने रोजगार दे रखा है। आज देश कोई घर नहीं होगा जिसमें Pidilite का प्रोडक्ट इस्तेमाल नहीं होता हो। लोग Pidilite को इतना नहीं जानते जितना वे Fevicol Fevikwik को जानते है।

 आज Pidilite इण्डिस्ट्रीज का टर्नओवर 5000 करोड़ के लगभग है और कुल बाजार में 70प्रतिषत हिस्सा Pidilite का ही है। इसके साथ ही आज Fevicol इसके सहयोग उत्पाद भारत ही नहीं बल्कि America, Thailand, Dubai और Bangladesh आदि में बिक रहा है।


सन 2013 में बलवंत पारेख की मौत हो गई लेकिन उनका बनाया ये प्रोडक्ट आज भी बाजार में सफलता के झंडे गाड़ रहा है और बलवंत पारेख को हमेशा उनके देश और समाज हित में किये गये इस कार्य के लिए बलवंत पारेख को याद किया जाता रहेगा।

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