Success Story of Quick Heal - Safalta ki Kahani


Kailash Katkar Life Struggle - Founder of Quick Heal Antivirus.
दोस्तों आज की Motivational Story Hindi एक ऐसे व्यक्ति की है जिसने काम सीखने के लिए दुकान में झाडु पौछा किया चाय लाने गये, अपने परिवार का सहारा देने के लिए बचपन में ही काम शुरू कर दिया और सिर्फ कक्षा 10 तक ही पढ पाये लेकिन Technology के प्रति जो उनका जुनुन था उसको कभी नहीं छोड़ा और आखिरकार जिंदगी के उतार चढाव देखते हुए आज एक Successful Businessman बने हुए है जो आज युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत है।

Wallpaper Quick Heal Founder Kailash Katkar
कैलाश काटकर का जन्म महाराष्ट्र के रहिमपुर के गांव में हुआ था। उनका जन्म एक मराठी परिवार में हुआ था। कैलाश का परिवार एक गरीब परीवार की श्रेणी में आता था। और कैलाश का बचपन गरीबी में ही बीता। अपने परिवार का सहारा देने के लिए कैलाश ने बचपन में ही काम करना शुरू कर दिया। बचपन में सिर्फ कुछ पैसों के लिए कैलाश कई छोटे-मोटे काम किया करते थे। इसके साथ ही कैलाश की पढाई में कुछ खास रूचि नहीं थी लेकिन उन्हे Technology ज्यादा पसंद थी। वे घर पर ही Radio घड़ी आदि Repair करके पैसा कमा लेते थे और उन्हे ऐसा काम करना पसंद था। परिवार की आर्थिक हालात अच्छे होने के कारण कैलाश सिर्फ कक्षा 10 तक ही पढ पायें। इसके बाद कैलाश ने अपनी रूचि को देखते हुए एक Radio और Calculator Repairing की दुकान पर काम करना चालु कर दिया। तनखाह के रूप् में उन्हे Monthly 300 रूप्ये मिलते थे। और साथ ही दुकान की साफ-सफाई का काम भी कैलाश को ही करना होता था। यहां तक की चाय लाने के लिए भी उन्हे ही भेजा जाता था। लेकिन काम सीखने के लिए कैलाश को यह सब मंजुर था।

कैलाश ने यही से काम सीखा और काफी सालों तक इसी दुकान में काम किया। फिर 1990 में 14-15 हजार की अपनी बचत से 1990 में अपनी Radio और Calculator Repairing की दुकान खोल ली। दुकान भी कैलाश की मेहनती होने के कारण अच्छी चलने लगी। लेकिन कुछ समय बाद Technology में बदलावा को देखते हुए कैलाश ने 1993 में कम्प्यूटर Repairing और Maintenance का काम शुरू कर दिया। इस काम में भी कैलाश ने सफलता हासिल की लेकिन उस समय भारत में इन्टरनेट की शुरूआत ही हुई थी और साथ ही Virus की समस्या भी काफी बड़ी थी साथ ही Floppy Drive का उपयोग होने के कारण Virus की समस्या काफी ज्यादा थी। इसका कैलाश के पास सिर्फ एक हल था कि Computer को Format किया जावे लेकिन यह भी इतना आसान नहीं था साथ ही उसमें लगने वाला समय भी काफी ज्यादा होता था। इसके अलावा बाजार में कई antivirus मौजूद थे लेकिन वे काफी महंगे थे जिन्हे खरीदना हर किसी ग्राहक के लिए काफी कठिन था।

Virus की इस समस्या से निजात पाने के लिए कैलाश ने अपने छोटे भाई सचिन जो कम्प्यूटर ग्रेजवेट थे से एक Tool बनाने को कहा और कुछ ही दिनों में सचिन ने कैलाश को एक Tool बना दिया। शुरूआत में कैलाश ने यह Tool अपने सभी ग्राहकों को Free में दिया और अपना काम करते रहे। Tool काफी अच्छा था जिससे कारण लोगों को Virus की समस्या से निजात मिली और लोगो को यह Tool पसंद आया।

फिर लोगो के कहने पर कैलाश ने इस बेचने का Plan पसंद आया और इसमें कुछ बदलाव करके और इसे Update करके 1995 तके Quick Heal का पहला वर्जन Launch किया गया। जो काफी सफल रहा लोगों का यह काफी पसंद आया क्योंकि यह अन्य Antivirus से भी काफी सस्ता और अच्छा था।
लेकिन बाजार में चल रहे Competition के कारण कैलाश को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा और आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण एक समय तो ऐसा आया की उन्होने इस Company को बन्द करने का सोचा।

लेकिन फिर अपने छोटे भाई की सलाह पर उन्होने इसे नये सिरे से और नई Planning से काम करने का मन बनाया और यह Planning कैलाश के लिए सफल रही और फिर सन 2002 में कैलाश ने पूणे में अपना Quick Heal का पहला Office खोला।
इसके बाद कैलाश ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और देखते ही देखते इस कंपनी ने तरक्की की। 2008 में Quick Heal ने Microsoft से Deal की जिससे Quick Heal Microsoft का एसोससिट पार्टनर बन गया
कुछ समय बाद कंपनी को 50 करोड़ का Loan भी मिल गया और Company ने अपने बाजार का विस्तार किया और नागपुर सहित देश के अन्य कई शहरों में अपने Office खोले। आज कैलाश की कंपनी देश में नही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपने Office खोल रखे हैं जिसमे जापान, US, UAE और कैन्या शामिल।
आज भारत के साथ-साथ 100 से भी ज्यादा देशों में क्वीक हिल Product का इस्तेमाल किया जाता है वर्तमान में पुरी दुनिया में 70 लाख से भी ज्यादा इसके User है। और कंपनी में Turnover 400 करोड़ से भी ज्यादा का है। Company में लगभग 500 से भी ज्यादा लोग काम करते हैं और इसके Dealer Distributor मिलाकर काफी लोग इससे जुडे़ हुए है और काफी लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
तो देखा दोस्तों कैसे एक साधारण आदमी ने अपनी मेहनत और अपने पसंद के काम को करके कामयाबी हासिल कि और मुश्किल के समय घबराने के बजाया उनका डटकर सामना किया। किसी ने सच ही कहा है कि कोषिष करने वालों की कभी हार नहीं होती


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कहानी पढ़ने  के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद......

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