परोपकार की राह पर भारतीय अरबपति- The Giving Pledge Effect




अब फ्री में मिलेगी 2.4 लाख छात्रों को उच्च शिक्षा

अभी हाल ही में दो भारतीय अरबपतियों ने अपनी संपति समाज के हित के लिए, दान करने के घोषणा की है। इसमें एक नाम नीलेकणी दंपति और दूसरा नाम एयरटेल भारती के सुनील मित्तल शामिल का है। इस धन का उपयोग मुख्य रूप से परोपकार के कामों में किया जायेगा। इसमें गरीब छात्र-छात्राओं के लिए यूनिवर्सिटी खोली जायेगी और उन्हे मुफ्त शिक्षा दी जायेगी। इसका लाभ उन गरीब बच्चों को होगा जो पैसे के कारण अपनी पढ़ाई पुरी नहीं कर पाते। इस काम से हमारे देश को कुछ और काबिल युवा मिलेंगे।


नंदन नीलेकणी जो इंफोसिस के चेयरमैन है और उनकी पत्नि रोहिणी नीलेकणी अपनी आधी संपति दान करेंगे। उनके पास 11,062 करोड़ रू. की संपति है। हाल ही में माइक्रोसोफ्ट के संस्थापक परोपकारी बिल गेट्स से मुलाकात के तहत यह फैसला हुआ जो ‘^ गिविंग प्लेज अभियान का हिस्सा है।


सफल हो रहा है द गिविंग प्लेज का प्रयास

सन 2010 में बिल व मिलिंडा गेट्स ने वारेन बफेट के साथ मिलकर इस फाउंडेशन की स्थापना की थी। इसके अन्तर्गल पुरे विश्व के अरबपति या कहे दुनिया के सबसे ज्यादा धनी अपनी संपति का हिस्सा दान करते है। जिसका उपयोग पुरे विष्व में जन कल्याण के लिए किया जाता है। जिसमें अब तक विश्व के कुल 171 लोग हस्ताक्षर कर चुके है यानि 171 लोगो ने अपनी संपति दान की है। और यह संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। यह एक बहुत ही अच्छा संकेत है पुरे विश्व के लिए। जैसा कि पुरी दुनिया में कई लोग अब भी गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी और अशिक्षा की समस्या से ग्रस्त है। लेकिन यह फाउंडेशन ऐसे ही लोगों के लिए काम करेगा और उम्मीद है कि पुरी दुनिया में बदलाव देखने को मिलेगा। मेरे हिसाब से बिल-मिलिंडा गेट्स और वारेन बफेट का यह काम दुनिया का सबसे अच्छा काम है।


इसी क्रम में एयरटेल के चेयरमैन सुनील मित्तल भी अपनी संपति में से 7,000 करोड़ रू. दान करेंगे। यह रकम भारती ग्रुप के प्रमोटर परिवार की कुल संपति का 10% है। इससे एक टेक्नीकल यूनिसर्सिटी खोली जाएगी, जो उत्तर भारत में हो सकती है जिसके अन्तर्गत 2.4 लाख स्टूडेंट्स को निशुल्क शिक्षा मिलेगी इसमें वरियता गरीब प्रतिभावन छात्रों को दी जायेगी इसके अलवा रकम का कुछ हिस्सा वे परिवार द्वारा संचालित भारती फाउंडेशन को देंगे।

हमारे देश में कई बच्चे है जिनम टेलेंट तो भरपूर है लेकिन घर की आर्थिक स्थति अच्छी होने के कारण उन्हे अपनी पढाई या तो छोड़नी पड़ती है या फिर अपनी मनपंसद का कोर्स करने के बजाय कोई दूसरा कोर्स कर लेते है। और अपने टेलेंट का भूलना पड़ता है।

भविष्य में अगर यह सिलसिला जारी रहता है तो भारत के युवाओं को अपनी मंजील पाने मे आसानी हो जायेगी और हर युवा कहेगा

सारे जहा से अच्छा हिन्दुस्ता हमारा …..

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