18 धंटे बर्तन धोकर भी बना इंटरनेशनल फोटोग्राफर- True Story



18 धंटे बर्तन धोकर भी बना इंटरनेशनल फोटोग्राफर-  Very Inspiring Story of Vicky Roy in Hindi
 
आज की कहानी एक ऐसे लड़के की है जिसने अपनी जिंदगी में बहुत दुख झेले। दुख भी ऐसे-ऐसे झेले जिन्हे झेलना हर किसी के बस की बात नहीं उसका एक उदहारण ले लिजीए कि यदि आपसे कहा जाये की आपको एक दिन में 18-19 घंटे कड़ाके की सर्दी में सिर्फ बरतन धोने है। तो आप अंदाजा लगा लिजिए ये काम रोज करना और कई दिनों तक करना आसान नहीं है। फिर भी उस लड़के ने हिम्मत नहीं हारी और हालातों को इतना बदल दिया कि आज वो लड़का मशहूर इंटरनेशनल फोटोग्राफर है।
 
Very Inspiring Story of Vicky Roy in Hindi. This Story will Motivate Everyone.
Wallpaper Vicky Roy international photographer of India


जी हाँ ये कहानी है मशहूर इंटरनेशनल फोटोग्राफर किसी विक्की रॉय की जो आज बहुत अच्छे मुकाम पर है।


विक्की का जन्म पुरूलिया गाँव में हुआ जो पश्चिम बंगाल राज्य में है। विक्की के परिवार में विक्की के अलावा 3 बहने और भाई थे। विक्की को घुमने का बचपन से शौक था। लेकिन विक्की की माँ उसे रोज मारती थी विक्की एक गरीब घर का लड़का था उनकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। इसी स्थिति के चलते विक्की के माँ-बाप ने विक्की को रहने के लिए उसके मामा के घर छोड़ दिया। लेकिन मामा के घर भी हालात सुधरने के बजाय बुरे होते गये। उसे वहां भी दिनभर काम करना पड़ता और रोज किसी ना किसी बात को लेकर पीटा जाता। उस जिंदगी से विक्की इतना परेशान हो गया कि एक दिन विक्की ने वहां से भागने की सोची। और हुआ भी वही विक्की अपने मामा की जेब से कुछ रुपये लेकर वहां से भाग गया उस समय विक्की की उम्र मात्र 11 साल थी। विक्की कैसे जैसे करके दिल्ली रेल्वे स्टेशन पहुँच गया। वहां विक्की इतनी भीड़ देखकर एकदम से धबरा गया और वही पर रोने लगा। विक्की को रोता देख किसी ने ध्यान नही दिया। लेकिन रेल्वे स्टेशन पर कचना बीनने वाले लड़को ने जो उसी की उम्र के थे। विक्की को संभाला। फिर विक्की उन लड़को के साथ ही रहने लगा। वो दिनभर खाली Mineral Water की बोतल ढुढता और उनमें पानी भरकर रेल यात्रीयों को बेचता। रात को विक्की रेल्वे स्टेशन पर ही सो जाता लेकिन परेशानी तब होती जब रात को पुलिस के डंडे खाने होते।

एक दिन किसी भले आदमी ने विक्की की हालत को देखकर उसे सलाम बालक ट्रस्ट में छोड़ दिया अब विक्की वही रहने लगा। वहां भी विक्की ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाया क्योंकि वहां बंदिशे ज्यादा थी और विक्की खुली हवा और आजादी ज्यादा पसंद करता था फिर क्या था एक बार फिर विक्की भाग गया। और फिर उसी रेल्वे स्टेशन पर रहना लगा। लेकिन इस बार विक्की को अहसास हुआ कि रेल्वे स्टेशन पर कचरा बीनने से कुछ होने वाला नहीं है। इसलिए विक्की ने नौकरी करने का मन बना लिया और दिल्ली के अजमेरी गेट पर ही एक होटल में बर्तन धोने का काम करने लगा। लेकिन वहां भी विक्की से साथ बहुत ही बुरा हुआ। कड़ाके की ठंड में रोज सुबह से रात तक विक्की से लगातार 18 घंटे सिर्फ बर्तन धुलवाये जाते। यह विक्की की जिंदगी का कठिन समय था। इस को विक्की ने काफी मुसीबतें झेलकर निकाला लेकिन वो कहावत है ना है ना कि जिसका कोई नहीं होता उसका उपरवाला होता है। ऐसी ही अच्छी सोच रखने वाले एक व्यक्ति ने विक्की के हाल देखकर कहा ये तुम्हारे काम करने की उम्र नहीं है ये तुम्हारे पढने की उम्र है। और उस व्यक्ति ने विक्की को अपना घर नामक ट्रस्ट में ले जाकर छोड़ दिया और वहां पर विक्की को पढने का मौका भी मिला विक्की का एडमिशन कक्षा 6 में हो गया।
 
इसके बाद विक्की ने दसवीं की परीक्षा दी लेकिन विक्की के नम्बर बहुत काम आये इसके बाद टीचर ने विक्की से उसके Interest के  बारे  में पूछा तो विक्की ने फोटोग्राफी बता दिया संयोगवश उन दिनों उस ट्रस्ट में ब्रिटिश फोटोग्राफर डिक्सी बेंजामिन आये हुए थे। टीचर ने विक्की का नाम डिक्सी को सजेस्ट कर दिया और फिर डिक्सी ने विक्की फोटोग्राफी और कैमरे की शुरुआती जानकारी दी लेकिन विक्की डिक्सी के साथ ज्यादा समय तक काम नहीं कर सके क्योंकि विक्की को English नहीं आती थी। और वो ज्यादातर बाते इशारो में ही करते थे।

इसके बाद विक्की इस के बाद विक्की ने एनी मान के साथ 3 साल तक काम किया इसमें एनीमान की कंडीशन थी की विक्की 3 साल तक काम करेगा वहीं पर विक्की ने फोटोग्राफी सीखी। विक्की को उस काम के कुछ नकद पैसा मिलता था जिससे विक्की का गुजारा हो  सके। फिर विक्की ने कैमरा भी लोन लेकर लिया।

2007 में विक्की ने फोटोग्राफी की एक प्रदर्शनी India Habitat Center में लगाई जिसका टॉपिक था स्ट्रीट ड्रीम्स यह प्रदर्शनी विक्की के लिए वरदान साबित हुई और उन्हे काफी तारीफे मिली। इसके बाद दक्षिण अफ्रिका इंग्लैण्ड सहित कई अन्य देशों में जाने का मौका मिला 2009 में विक्की ने World Trade Center की फोटोग्राफी की। जिसके लिए सलाम बालक ट्रस्ट द्वारा उन्हे सम्मानित किया गया। इसके बाद उन्हे कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 2011 में विक्की ने गरीब बच्चों के लिए फोटोग्राफी किताबों की लाईबेरी बनाई जिसमें अन्य कई फोटोग्राफरों ने अपना योगदान दिया। इसके अलावा विक्की ने एक किताब भी लिखी है जिसका नाम होम स्ट्रीट होम है

वर्तमान में विक्की एक Freelance फोटोग्राफर काम करते है और इस कमाई से वो अपने परिवार का गुजारा करते है। आज विक्की एक सफल व्यक्ति है।

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