कहानी कभी ना हार मानने वाले व्यक्ति की-Story will inspire everyone

1000 से भी ज्यादा असफलताओं को भूलकर सफलता हासिल की- Motivational Story in Hindi


Story will inspire everyone
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कहानी कभी ना हार मानने वाले व्यक्ति की

क्या आपने कभी सोचा है कि जब हमें किसी भी काम में असफलता मिलती है, तो हमें कितना दुख होता है। वो असफलता हमे काफी समय तक कुछ अच्छा सोचने का कुछ नया करने नहीं देती और उस असफलता को भुलाकर हमें फिर एक नया प्रयास करना होता है। लेकिन अगर व्यक्ति अगर 1000 से भी ज्यादा बार असफल हो जाये तो शायद साधारण आदमी अपना प्रयास करना छोड़ देगा और कहेगा शायद ही इस जिंदगी में मै शायद ही सफल हो पाउंगा। लेकिन आज की कहानी ऐसे आदमी कि है जिसने 1000 से भी ज्यादा बार जीवन में असफलता मिली लेकिन फिर भी हार नहीं मानी और इतनी फैलियर के बाद भी प्रयास करना जारी रखा और अतः 62 साल की उम्र के बाद उनको सफलता मिली, सफलता भी ऐसी मिली जिसकी मिसाल दुनिया का हर आदमी देता है। ये व्यक्ति है केएफसी -केंटकी फ्राईड चिकन के मालिक हरलैण्ड सेण्डर्स



हरलैण्ड सेण्डर्स का जन्म 9 सितम्बर 1890 को इण्डियाना के शहर हेनरी विल में हुआ था। उनके पिता का नाम हेनरी सेण्डर्स और माता का नाम मागे्रट था। जब वे 5 साल के थे तो बीमारी की वजह से उनके पिता की मौत हो गई। घर में कमाने वाला आदमी ना होने की वजह से उनके घर की आर्थिक स्थिति खराब हो गई। इस खराब स्थिति को देखते हुए उनकी माँ ने बाहर जाकर काम करना शुरू कर दिया। माँ के जॉब करने की वजह से घर का सारा काम 7 साल के हरलैण्ड सेण्डर्स करते थे वो घर के काम के साथ-साथ अपने छोटे भाई बहन को भी सँभालते थे 7 साल की उम्र में वे खाना बनाने में माहिर हो गए। कुछ सालो बाद उनकी माँ ने दुसरी शादी कर ली और वो अपने सौतेले पिता के साथ रहने लगे। लेकिन उनके सौतेले पिता से उनके रिलेशन कभी सही नहीं रहे। इसी वजह से 1903 में वे घर से भाग गए और खेत में जाकर रहने लगे। कुछ दिनों वहां रहने के बाद उनके अंकल उनको अपने साथ लेकर चले गए और वहां पर उन्होनें अंकल की सहायता से कंडक्टर की नौकरी हासिल की। यह नौकरी उन्होने 4 साल तक की इसके बाद वे रेल्वे मे नोकरी करने लगे। उस समय उनकी उम्र केवल 19 साल की थी इसके बाद हरलैण्ड सेण्डर्स ने जोसफी नामक लड़की से शादी कर ली। कुछ ही दिनों में उनका परिवार बढ़ता गया लेकिन इसी बीच उनकी रेल्वे की नौकरी जाती रही। नौकरी जाने के बाद उनकी पत्नि भी उनको छोडकर चली गई और बच्चों को भी साथ ले गई। अपने बेटी से मिलने के लिए हरलैण्ड सेण्डर्स ने उसको kidnap करने की कोशिश की लेकिन इसमें भी वो असफल रहे।

फिर उन्होने हाइवे पर एक गेस स्टेशन खोला, साथ ही ग्राहकों के खाने पीने को ध्यान में रखकर एक छोटा सा रेस्टोरेंट भी खोला। वो इस रेस्टोरेंट में कई तरीके के चिकन बनाते थे इस रेसिपी को और बड़िया बनाने के लिए उन्होने होटल मैनेजमेंट का कोर्स भी किया। वह रेस्टोरेंट ठिक चल निकला। उनके बनाये तले हुए चिकन का पसंद किया जाने लगा। एक बार वहां के गर्वनर का हरलैण्ड सेण्डर्स का चिकन इतना पसंद आया कि उन्होने हरलैण्ड सेण्डर्स को कर्नल की उपाधी दी। इसके बाद उन्होने इसकी कई ब्रांचे खोली लेकिन एक बार फिर वे असफल ही रहे। हाइवे के विस्तार होने के वजह से जो उनका इकलौता कमाई का जरीया भी जाता रहा। अब उनकी उम्र लगभग 62 वर्ष हो चुकी थी।
फिर उन्होने अपने चिकन बनाने के युनिक फामुले कि मार्केटिंग शुरू की। और वो होटल दर होटल धुमते रहे और हर होटल मालिक ने उन्हे रिजेक्ट कर दिया। लगभग 1000 से भी ज्यादा रिजेक्ट होने के बाद वो सफल हुए और उनके चिकन बनाने के अनोखे तरीका का पंसद कर लिया गया सन 1952 में पहला तले चिकन का रेस्टारेंट खोला गया। इसके बाद हरलैण्ड सेण्डर्स ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। और देखते ही देखते आज केएफसी  118 देशों से भी ज्यादा में है।18800 के आउटलेटस है। केएफसी की कमाई आज अरबों रूपयों में है। इसके बाद 16 दिसंबर 1980 को हरलैण्ड सेण्डस की मौत हो गई। लेकिन उनकी सफलता आज भी पुरी दुनिया देख रही है।
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