हालातों को हरा कर बने चैम्पियन - Olympic Champion Sushil Kumar Biography in Hindi



सुशील कुमार की बायोग्राफी हिंदी में 
Olympic Champion Sushil Kumar Biography in Hindi



अगर आप सोचते है कि बिना सुविधाओं के सफल होना मुमकिन नहीं है। तो आज की कहानी आपको जरूर गलत साबित करेगी। आज की कहानी एक ऐसे व्यक्ति कि है जो बिना सुविधाओं के सिर्फ अपनी मेहनत और निरंतर अभ्यास के दम पर देश को ऐसा सम्मान दिलाया जो हर कोई नहीं कर सकता है। एक ऐसा पहलवान जिसने भारत को 2008 ओलम्पिक खेल कास्य पदक और 2012 के ओलम्पिक में भारत को रजत पदक तथा 2018 कामनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जितकर लगातार 3 गोल्ड जितने वाले खिलाड़ी बनकर हमारे देश का मान बढाया। एक बिल्कुल साधारण परिवार में जन्म लेकर भी अपनी मेहनत और जुनुन के दम पर एक अपना अलग मुकाम हासिल किया।




सुशील कुमार का जन्म दक्षिण दिल्ली के नजफगढ के पास बापरोला गाँव में 26 मई 1983 को हुआ था। उनका पुरा नाम सुशील कुमार सोलंकी है। उनके पिता दिवान सिंह, एक ड्राईवर थे और माता कमला एक हाउसवाईफ थी। सुशील के पिता भाई भी एक पहलवान थे। उन्हे देखकर और उनसे प्रेरित होकर सुशील ने पहलवानी की शुरूआत की लेकिन घर की माली हालत ठीक होने नहीं के कारण परिवार एक से ज्यादा पहलवानों की खुराक का खर्चा नहीं उठा सकता था। इसलिए यह निर्णय लिया गया कि परिवार में सिर्फ सुशील कुमार ही तैयारी करेंगे और सुशील के लिए उनके भाई ने पहलवानी छोड़ दी।
 

14 वर्ष की उम्र में सुशील ने छत्रसाल स्टेडियम में पहलवानी के गुर सिखने शुरू कर दिये जो उनके घर से तीस किलोमीटर की दुरी पर था। सुशील के पिता रोज साईकिल से अपने पुत्र के लिए 4 किलो दुध और अन्य जरूरी सामान पहुचातें ताकि उन्हे कोई परेशानी ना हो। छत्रपाल स्टेडियम में सुशील ने पहलवानी के गुर महाबली सतपाल से सिखे जो आगे चलकर उनके ससुर भी बने। सुशील रोज सुबह 5 बजे उठकर ही पहलवानी का अभ्यास किया करते थे। इसके साथ ही सुशील ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक भी पुरी की है।
 

सुशील ने 2008 में दोहा एशियाई खेलों में कास्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा सबके सामने साबित की और अपने परिवार द्वारा किये गये बलिदान को भी सही साबित कर दिया। इसके बाद 2009 में सीनीयर एशियाई चैम्पियनशिप मे रजत तथा राष्ट्रमण्डल कुश्ती प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। लेकिन विश्व कुश्ती चैम्पियन में वे 8वे स्थान पर रहे लेकिन अच्छी खबर ये थी कि वे ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई कर चुके थे। वर्ष 2010 में विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया और पहले ऐसे पहलवान बने जिसने विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता हो। इसके बाद 2012 लंदन ओलम्पिक में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। सुशील पहले ऐसे पहलवान है जिन्होने देश लगातार दो ओलम्पिक में पदक जीता है।

कामनवेल्थ गेम में भी सुशील कुमार का खेल शानदार रहा है। वर्तमान 2018 कामनवेल्थ में भी सुशील कुमार ने जोहानेस बोथा को 10-0 से हराकर गोल्ड मेडल जीता है। इसके साथ ही वे कामनवेल्थ में लगातार 3 गोल्ड मेडल जीतने वाले खिलाड़ी बन गये हैं।

इन सब सफलताओं को देखते हुए सुशील को पदमश्री, अर्जुन पुरस्कार और राजीवगांधी खेल रत्न जैसे सम्मानीय पुरस्कारों से सम्मनित किया जा चुका है। इसके अलावा हरियाणा सरकार, दिल्ली सरकार केन्द्र सरकार द्वारा उन्हे नकद राशि इनाम स्वरूप दी गई है।

सुशील कुमार पूर्ण रूप से शाकाहारी है वे अपनी खुराक के रूप में 200 ग्राम मक्खन, गर्मी में ग्लुकोज, बादाम गिरी सुबह और शाम में लगभग 3 किलो दुध दिन में चपाती फलों का रस आदि लेते है। इसके साथ ही वे रोजाना 5 घंटे प्रेक्टिस करते है। खेलों में वे बास्केटबाल, बालीबाल और फुटबाल खेलते है। सुशील फुटबाल के अच्छे खिलाड़ी है।


सुशील कुमार ने अपने गुरू सतपाल की बेटी से शादी की है और उनके दो पुत्र है। सुशील एक शांत स्वाभव के पहलवान है जिसकी तारीफ पाकिस्तानी पहलवान भी करते है। उन्हे अपनी मां के हाथ के पराठे और उनके हाथ का मक्खन काफी पसंद है। खाली समय में वे गीत गुनगुनाते है उन्हे संगीत पसंद है। वर्तमान में वे भारतीय रेल्व में कमर्शियल मैनेजर के पद पर कार्यरत है।


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