जिद से बदली दुनिया - Rajat Sharma Motivational Story in Hindi



India TV Founder Rajat Sharma Success Story in Hindi



आज की MOTIVATIONAL STORY HINDI एक ऐसे आदमी की है जिसने गरीबी को काफी करीब से देखा और उस गरीबी के चलते पढने के लिए रेल्वे स्टेशन पर जाकर पढाई कि, पैसे की कमी की वजह से पैदल ही स्कूल गये। लेकिन फिर भी हिम्मत नहीं हारी और लगातार मुश्किलों का सामना करते रहे। और सफलता की ऐसी जिद पुरी की जिससे उनकी पुरी Life बदल गयी। आज वे युवाओं के Inspiration बने हुए है।

India TV Founder Rajat Sharma Success Story in Hindi, Who Inspire Everyone
Wallpaper India TV Founder Rajat Sharma


 रजत शर्मा का जन्म 18 फरवरी, 1957 को हुआ था। रजत के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। रजत को बचपन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस परिवार में रजत के साथ उनके 5 भाई 1 बहन और माता-पिता भी रहते थे। रजत के माता-पिता ज्यादातर बीमार रहते थे। रजत का परिवार पुरानी दिल्ली के सब्जी मण्डी इलाके में एक 10गुणा10 के कमरें में रहते थे। जिस कमरे में वो रहते थे वहा पुरे 9 लोग सही तरीके से सो नहीं पाते थे इसलिए उनहे एक पलंग के उपर तख्त लगाकर सोना पड़ता था जैसा हमने हॉस्टल वगैरहा में देखा है। उस मकान के पानी व बिजली की कोई सुविधा नहीं थी। लेकिन रजत को पढ़ाई में बहुत रूचि थी और उनको पता था कि अगर इस गरीबी को दूर करना है तो पढना बहुत जरूरी है। जब भी उनको रात को पढना होता था तो पास के रेल्वे स्टेशन पर उसकी लाईट के नीचे पढते थे। और नहाने के लिए वे सरकारी नल पर जाकर नहाते थे।



रजत शर्मा की शुरूआती शिक्षा सब्जी मण्डी के पास एक सरकारी स्कूल सनातम धर्म स्कूल में हुई थी। एक बार बचपन में एक अजीब घटना रजत शर्मा के साथ हुई। वो अकसर पड़ोस में टीवी देखने जाया करते थे। लेकिन एक बार जब रजत शहीद भगत सिंह देखने गए तो पड़ोसी ने दरवाजा बन्द कर लिया और रजत अपने घर लौट आये। घर पर आकर रजत ने यह बात अपने पिताजी को बताई तो पिताजी ने कहां कि तुम रोज यु दुसरो के घर जाकर किसी तीसरे को देखने जाते हो अगर इतना ही शौक है तो तुम खुद टीवी पर आकर दिखाओ। यह घटना रजत के दिल पर लग गई। उसी दिन से उन्होने सफल होने की जिद कर ली और उसी घटना का परिणाम है कि आज रजत शर्मा टीवी के जाने-माने व्यक्ति है।



क्यों कि पढाई में वे Intelligent थे और उनके Marks भी अच्छे आते थे इस कारण कई टीचर का उनसे लगाव था। इसी लगाव के कारण एक टीचर ने आगे की पढाई के लिए रजत का दाखिला रामजस हाई स्कूल में करवा दिया। लेकिन वो स्कूल करौल बाग में था। रजत ये दुरी पैदल ही तय किया करते थे। क्योकि उनके पास Bus के लिए किराया नहीं होता था। स्कालरशिप के रूप में उन्हें 50रू. मिलते थे और इसी पैसे में रजत को अपने सालभर का खर्चा चलाना होता था। कैसे जैसे करके रजत ने यह पढ़ाई पुरी की। लेकिन रजत के नम्बर हर बार की तरह बहुत अच्छे थे।



इसके बाद रजत का दाखिला श्रीराम कॉलेज आफ कामर्स में हो गया। लेकिन यह दाखिला भी बड़ी मुष्किल से स्कोलरषिप व अन्य लोगों की मदद से हो पाया। यहां पर रजत ने बहुत कुछ सीखा। श्रीराम कॉलेज आफ कामर्स दिल्ली का एक बड़ा कॉलेज था जिसमें बड़े घर के लड़के पढने आया करते थे। और उन्ही लड़को में से एक थे अरूण जेटली, अरूण जेटली ने रजत की आर्थिक हालात को देखते हुए उनकी Help की थी। जिस अरूण जेटली का नाम यहा आ रहा है वे वर्तमान में भारत सरकार के माननीय केन्द्रिय वित्त मंत्री है।



अब रजत नौकरी की तलाश कर रहे थे इसी दौरान उनकी मुलाकात जेपी ठाकुर से हुई जो एक प्रसिद्ध पत्रकार थे। और वे आनन्द बाजार पत्रिका छोड़कर अपना काम कर रहे थे। ठाकुर ने रजत को 400रू प्रतिमाह पर एक रिसर्चर के रूप में नौकरी दे दी। इसी रिसर्च से जेपी ठाकुर की अनुमति लेकर रजत ने एक आर्टिकल लिखा। और वो Onlooker में प्रकाषित हो गया और रजत को इसके बदल मिले पुरे 300 रू.। इसके बाद Onlooker ने रजत को ट्रैनी पत्रकार के रूप में नौकरी दे दी। लेकिन रजत ने 2 साल में ही काफी तरक्की कर ली। अपनी मेहनत और जुनुन के दम पर इतने कम समय में वे ब्युरो चीफ बन गये।



1992 में एक बार जब रजत एक हवाई यात्रा कर रहे थे तो उनके एक दोस्त ने उनकी मुलाकात जी नेटवर्क के मालिक सुभाष चंद्रा से करवाई। और फ्लाईट में ही आप की अदालत को Rough Layout रजत ने सुभाष चंद्रा को समझा दिया। बस फिर क्या था सुभाष चंद्रा इसके लिए राजी हो गये और रजत को ही एंकर बनाकर आप की अदालत शो शुरू हो गया। आप की अदालत का पहला शो 14 मार्च 1993 को प्रसारित हुआ जिसके पहले गेस्ट थे लालु प्रसाद यादव। लालु प्रसाद यादव उस समय अपने प्रसिद्धी के बड़े मुकाम पर थे। इसके बाद आज तक आपकी अदालत लगातार 1993 से प्रसारित हो रहा है। और इस कार्यक्रम में भारत की लगभग हर मशहूर हस्ती भाग ले चुकी है।



2004 में रजत ने अपना खुद का चैनल इण्डिया टीवी शुरू किया। लेकिन शुरूआती दौर इस चैनल का अच्छा नहीं रहा और एक बार तो ऐसा मौका आया की रजत शर्मा को अपनी प्रॉपर्टी बेचकर अपने कर्मचारीयों की तनख्वाह देनी पड़ी। फिर भी रजत ने हार नहीं मानी और अपनी कम्पनी की रणनीति में बदलाव करके कुछ ही दिनों में इण्डिया टीवी को भारत के बेहतर चैनलों में शामिल करवा दिया।



सन् 2015 में रजत शर्मा को पदम विभूषण से नवाजा गया। यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा सम्मान है जो उन्हें शिक्षा व साहित्य के क्षेत्र में दिये गये उनके योगदान के लिए दिया गया था। आज रजत शर्मा एक सफल व्यक्ति है लेकिन वे आज भी अपने पुराने दिन नहीं भूलें है। कई इंटरव्यूह में खुद अपने अतीत के बारे में बताते रहते है। लेकिन आज वे युवाओं के प्रेरणास्त्रोत बने हुए है। हर व्यक्ति जो अपने जीवन में हालातों से जुझ रहा है वो रजत शर्मा की कहानी से प्रेरणा ले सकता है।

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