भारत के मिल्कमैन की कहानी- Amul Dairy Success Story in Hindi

Amul Dairy Ceo Kurien Verghese Story in Hindi

आज की Motivational Story Hindi एक ऐसे आदमी कि है जिसने बड़ी डिग्री हासिल करके भी डेयरी प्रोडक्ट में अपना अभूतपूर्व योगदान दिया और वो सब भी किया तो सिर्फ गाँव वालों को उनका हक दिलाने के लिए। और वो कहते है ना अगर आप कोई भी काम समाज के भले के लिए करते है तो आप एक दिन जरूर सफल बनोगे। और हुआ भी वहीं आज वह व्यक्ति पुरे देश में Milkman of India कहलाता है।
Amul Dairy Ceo Kurien Verghese Success Story in Hindi
Amul Company Wallaper
बात भारत के आजाद होने के पहले कि है। गुजरात के गांवों में दुध उत्पादकों से दुध खरीदकर बिचौलियों द्वारा बेचा जाता था। इसमें किसानों को अपने दुध के दाम बहुत ही कम मिलते थे और ग्राहकों को भी दुध का दाम ज्यादा चुकाना पड़ता था। क्यों कि एक बडी राशी बिचौलियें खा जाते थे। और उस समय विदेशी Polson Dairy भारत में थी जो एक विदेशी कम्पनी थी दुध उत्पादकों को मजबुरी में इसी डेयरी को अपना दूध बेचना पड़ता था वो भी बहुत कम दाम में।

इसी समस्या के समाधान के लिए स्वतंत्रता सेनानी त्रिभुवन दास मोरारजी देसाई सरदार बल्लभ भाई पटेल ने एक Cooperative Company की स्थापना की गई। इस Cooperative Company का नाम रखा गया कैरा जिला दुध उत्पादक संघ लिमिटेड। Cooperative Company वह होती है जहा कुछ लोगों का समूह मिलकर एक कम्पनी की स्थापना करता है। और दुध उत्पादकों को इसके बारे में बताया गया कि आप अपना दुध बिचौलियों को ना बेचकर इस Cooperative Company को बेचे जिससे आपको दुध का उचित दाम मिल सके।

सन दिसम्बर 1949 मे Company के CEO पद पर त्रिभुवन दास ने वर्गीज कुरियन को नियुक्त किया। इससे पहले वर्गीज कुरियन आनन्द जिले में सरकार के दुध मक्खन कारखाने में इंजीनीयर थे और उन्हे दुध उत्पाद में भी अनुभव था। वर्गीज कुरियन का जन्म केरल के कोडिकोड क्षेत्र में सन् 1921 को हुआ था। वे बहुत ही Qualified व्यक्ति थे उन्होने लोयला College मद्रास से स्नातक Degree और अमेरिका से मास्टर आफ साइंस की Degree हासिल कि। वे एक सच्चे देश प्रेमी थे इस लिए उन्होने यह नौकरी की।

कोऑपरेटिव कम्पनी ने दुध उत्पादकों को समझाना चालु किया और कुछ ही समय में परिणाम आने लगे। इसी बीच इस कम्पनी का नाम बदलकर Amul कर दिया गया। Amul शब्द अमूल्य से लिया गया है क्योंकि पहले वाला नाम काफी बड़ा था और वह थोड़ा मुश्किल भी था। वर्गीज कुरियन ने कुछ ऐसा मॉडल तैयार किया कि दुध उत्पादकों को उनके दुध का पुरा दाम भी मिले और ग्राहकों को भी अच्छा दूध मिले। और देखते ही देखते अमुल कम्पनी ने पुरे भारत में अपनी Supply चालु कर दी देश आजाद हो चुका था। और Amul भारत की पहली डेयरी बनी।

इसके अलावा वर्गीज ने भैस के दुध से पाउडर बनाने में भी सफलता हासिल कि इससे पहले लोगों का यह लगता था कि सिर्फ गाय के दुध से ही पाउडर बनाया जा सकता है। लेकिन जल्द ही वर्गीज कुरियन ने भैंस के दूध से दुध पाउडर का निर्माण कर सभी को गलत साबित कर दिया।

दुध के सही दाम दुध उत्पादकों में देने के साथ-साथ ग्राहकों को भी सही समय पर दुध उपलब्ध कराने के लिए वर्गीज ने दुध प्रोडक्शन और वितरण को कई भागों में बांट दिया। जैसे पहले गांवों से दुध इकठा किया जाता बाद में जिला स्तर पर इक्ठा होकर Check किया जाता और जिला स्तर पर ही प्लांट में चला जाता और Pack किया जाता। फिर राज्य स्तर और फिर पुरे देश में Supply किया जाता। कुछ आने वाले सालों में अमूल ने अपनी क्वालिटी और शानदार एडवरटाईजिंग के दम पर पुरे भारत में अपने आप को स्थापित कर लिया। आज अमूल दुध के साथ साथ Milk Powder, Butter, Paneer, Ice Cream जैसे कई डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराता है। Amul से आज लगभग 33 लाख लोग जुड़े हुए है।

वर्गीज कुरियन के इस योगदान के लिए उन्हे पदम विभूषण, कृषि रत्न एवं पदम श्री जैसे बड़े पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। इसके अलावा उन्हे 1963 में मैग्ससे पुरस्कार भी मिल चुका है। भारत में उन्हे Milk Man और स्वेत क्रांति का पिता भी कहा जाता है।

कुरियन वर्गीज ने अपनी किताब आई टू हैड ड्रिम किताब में लिखा है कि मैरी पहचान एक साधारण आदमी के रूप् में होनी चाहिए और उनकी यह बात वास्तव में उन पर लागू होती है।

9 सितम्बर, 2012 को वर्गीज कुरियन की मौत हो गई और भारत ने एक महान हस्ती को खो दिया। लेकिन वे आज भी अपने योगदान के लिए हमेशा याद किए जाते रहेंगे। उनके जन्म दिवस को भारत में नेशनल मिल्क डे के रूप में मनाया जाता है।


ते देखा दोस्तों कैसे एक व्यक्ति ने बड़ी पोस्ट की आराम वाली नौकरी करने के बजाय अपने देश के निर्माण में योदानन दिया ताकि दुध उत्पादकों को उनका हक मिल सके।

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