उधार के पैसों से भी तरक्की - Dilip Shanghvi Success Story

Life Journey of Dilip Shanghvi
दोस्तों आज की Motivational Story Hindi एक ऐसे व्यक्ति की है जिसने उधार के पैसे लेकर और सिर्फ 2 आदमियों के साथ अपना कारोबार चालु किया और अपनी मेहनत लगन और दूरदर्शिता के दम पर सफलता हासिल की और कई घाटे में चल रही कम्पनियों को खरीद कर उन्हे फायदे का सौदा बनाया और आज वे कम्पनियों भी उनकी आय का मुख्य स्त्रोत है।
Success Story of Sun Pharma in Hindi Motivation to all new generation
Sun Pharma Founder Dilip Shanghvi Story

दिलीप सांघवी का जन्म 1 अप्रैल 1955 को गुजरात के अम्बरेली में हुआ उनके पिता शांतिलाल सांघवी कोलकाता में दवाओं के Distributor थे। उनकी माता कुमुद सांघवी एक Housewife थी। दिलीप की प्राथमिक शिक्षा कोलकाता में हुई और दिलीप एक होनहार Student थे वह कक्षा में हमेशा आगे रहा करते थे। इसके अलावा दिलीप को दवाओं की जानकारी अपने पिता के व्यापार से मिली और सीखते-सीखते दिलीप को दवाओं के व्यापार की अच्छी जानकारी हो गई। दिलीप ने अपनी College की Degree भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी College से B.Com पूरी की।
इसके बाद दिलीप कुछ बड़ा करने और अपने सपनों को पुरा करने Mumbai गये। और अपने साथ लाये ` 10000 जो उन्होने अपने पिता से उधार लिए थे। यहीं से उन्होने शुरूआत की सन फार्मा कि शुरूआत में सिर्फ 2 लोगों के साथ और सिर्फ 5 दवाओं में Business शुरू किया गया और पहले साल ही सनफार्मा में 65 लाख का व्यापार किया। इसके बाद दिलीप ने गुजरात के वापी में पहली Production Unit लगा ली और अपने स्तर पर दवाओं का निर्माण करने लगे यह Factory सिर्फ 5 लोगों के साथ शुरू की गई थी। और इन दवाओं की Supply कुछ शहरों में ही की जाती थी। लेकिन कुछ ही सालों में सनफार्मा की दवाइयों पुरे देश में बिकने लगी। इसके बाद दिलीप ने कभी पीछे मुड़कर नही देखा।

सन 1989 में दिलीप ने भारत के साथ-साथ अपने पड़ोंसी देशों को भी दवाओं का Export चालु कर दिया और यह Export उनकी आय का मुख्य जरीया बना। इसके बाद दवाओं के निर्माण में Quality के लिए 1990 Research Center चालु किया गया।
इस समय दिलीप सिर्फ उन दवाओं का निर्माण करते थे जिनका या तो Patent नहीं था या फिर वे बड़ी दवा कंपनी उन्हें ज्यादा महत्व नहीं देती थी। इसके साथ ही उनकी Marketing और Business करने का तरीका भी बेहतर था जिससे उन्होने समय समय पर कई बड़ी Deal हासिल कि।
इसके बाद 1994 में सन फार्मा का पहला IPO आया और इस IPO ने कभी भी Investors को निराश नहीं किया और अच्छा मुनाफा कमा कर दिया है। इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते है कि अगर किसी ने 1994 में 10000 का Invest इस कंपनी में किया होगा तो उस Invest की कीमत आज लगभग 50 लाख है।
दिलीप सांधवी की इस सफलता में एक बड़ा हाथ उनकी दूरदर्शिता का भी है उन्होने कई घाटे में चलती कम्पनियों को खरीद कर और उनके Strategy में बदलाव कर उन्हे फायदे का सौदा बनाया और आज वे कम्पनियां ही दिलीप सांधवी की Income का एक बड़ा Source है इनमें से मुख्य कम्पनियां केरोगा, टेराफार्मा और सन 2015 में एक बड़ी कम्पनी Ranbaxy को 25000 करोड़ से ज्यादा में खरीदा है।
सन फार्मा के व्यापार भारत के अलावा World के 22 से भी ज्यादा देशों में फैला हुआ है और आज उनकी supply पुरे देश में सबसे ज्यादा है सन फार्मा देश की सबसे बड़ी फार्मा कम्पनी है।
सन फार्मा की तरक्की के साथ-साथ दिलीप सांधवी की दौलत भी काफी ज्यादा हो गई है। और एक वक्त तो ऐसा आया कि जब दिलीप सांधवी ने भारत के सबसे धनी आदमी- मुकेश अंबानी को पछाड़कर भारत के सबसे अमीर आदमी बने। वर्तमान में दिलीप सांधवी भारत के दूसरे सबसे Rich आदमी है।
आज दिलीप सांघवी की कम्पनी भारत की Number One कम्पनी है और उसके आस-पास कोई और कम्पनी भी नहीं है और यह कम्पनी World की 5वी सबसे बड़ी दवा कम्पनी है। और आज इस कम्पनी में 50000 से ज्यादा लोग काम करते हैं।
दिलीप सांधवी को इन सफलताओं और उचाइयों के लिए सन 2016 में पदम श्री से नवाजा गया है और Time Magazine ने भारत के 100 शक्तिषाली लोगों में उन्हे 8वां स्थान दिया है।

इस कम्पनी की Success का पुरा Credit दिलीप सांघवी की मेहनत लग्न और दूरदर्शिता को जाता है जिन्होने उधार के पैसे से भी आज 1 लाख करोड़ से भी ज्यादा का Empire खड़ा कर दिया और दिखा दिया कि व्यक्ति अगर चाहे तो किसी भी हालात में Success हासिल कर सकता है और कोई भी बाधा ऐसी नहीं है कि जिससे आदमी पार नहीं पा सके।
आप भी दिलीप सांधवी के जीवन से प्रेरणा लेकर मुश्किल हालातों से लड़ना और उनसे निपटना सीख सकते है।

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कहानी पढ़ने  के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद.....

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