होंडा की कहानी - Life Changing Story of Soichiro Honda


होंडा की कहानी - 
Life Changing Story of Soichiro Honda
आज की कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जिसे सभी लोग नहीं जानते लेकिन उनकी Company को पुरी दुनिया जानती है एक समय लोहार का काम करने वाले सोईचिरो ने अपनी मेहनत लगन और कभी ना हार मानने वाली सोच के कारण बुरी से बुरी स्थिति का सामना करके सफलता हासिल की और खड़ी करदी, दुनिया की सबसे बड़ी Two-wheeler कंपनी

Motivational Story in Hindi, Soichiro Honda Biography in Hindi, Top Two Wheeler Company Honda Success Story in Hindi,
Honda Company Story in Hindi
सोइचिरो होण्डा का जन्म जापान के 1906 में 17 नवम्बर गांव सिजोओका में हुआ था जो जापान में है। उनके पिता एक छोटे से लौहार थे और अपनी आजीविका चलाने के लिए पुरानी खराब साईकिल खरीद कर उन्हे रिपेयर करके बेचा करते थे। सोइचिरो को भी अपने पिता के साथ काम करना पसंद था। और उन्हे इस काम से बहुत लगाव था।

सोइचिरो के घर का माहौल पढाई वाला नहीं था और साथ ही सोइचिरो को भी पढ़ना पसंद नहीं था। इसलिए जब वे 17 साल के थे तो उन्होने पढाई छोड़ दी। और काम की तलाश करने लगे।

एक अखबार में कार मेकेनिक की Vacancy देखकर सोइचिरो टोक्यों चले गये और उन्हे इस कंपनी में नौकरी तो मिल गई लेकिन सिर्फ साफ-सफाई कि क्यों सोइचिरो की उम्र में उस समय सिर्फ 17 साल थी और वो उस Company के सबसे छोटे कर्मचारी थे।

लेकिन फिर सोईचिरों ने सुगाई कंपनी मालिका को Request किया कि उन्हे मिस्त्री का काम करने दिया जाये सुगाई Company मालिक मना नहीं कर सके और उन्हे बतौर मिस्त्री दुसरी जगह काम करने के लिए भेज दिया गया। वहां दिन-रात मेहनत करके वे अच्छे मिस्त्री बन गये। उस समय सुगाई कार काफी Race में भाग लिया करती थी। और सोईचिरों भी इसी Car में मिस्त्री का काम किया करते थे। एक रेस में सुगाई कार की जीत हुई और सोईचिरों उसमें मिस्त्री थे।

इसके बाद इसं कपनी ने काफी तरक्की की और काफी सारे Office खोले गये एक आफिस का Head बनाया गया सोईचिरों को। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 21 साल की थी। लेकिन कुछ समय बाद सोईचिरों ने यह नौकरी छोड़ दी और अपने घर वापस गये।

इसके बाद सोईचिरों ने कुछ नया करने का सोचा और वे कारों के Piston बनाने लगे। शुरूआत में काफी मेहनत के बाद उन्हे Toyota कंपनी से करार हुआ और वे Toyota को अपने Piston सप्लाई करने लगे।

इसी दौरान होण्डा का रेस के दौरान Accident हुआ। और उन्हे काफी समय तक हास्पिटल में रहना पड़ा और। इसी दौरान होण्डा की टोयटा से हुई डील के Cancel हो गई क्योंकि होण्डा के द्वारा बनाये गये Piston तय मानको के हिसाब से नहीं थे। इस दौरान होण्डा को काफी बुरे हालातों से गुजरना पड़ा। और उस समय होण्डा का काफी बुरा समय चल रहा था और वे अपने जीवन की सारी कमाई खो चुके थे।

होंडा का बुरा समय यहीं खत्म नहीं हुआ और 1944 में दुसरे विश्व युद्ध के दौरान होण्डा को अपने सारे कर्मचारियों को जंग के लिए भेजना पड़ा जिससे उनकी कंपनी में पुरष कर्मचारी नहीं रहे ऐसे समय में होण्डा ने समझदारी से काम लेते हुए महिलाओं को ही थोड़ी बहुत Training से ही इस काम के लिए तैयार कर लिया और काम को कई आसान Steps में बदलकर अपने Production को जारी रखा।

लेकिन हौंडा के जीवन में बुरा वक़्त यहीं खत्म नहीं हुआ और दुसरे विश्व युद्ध के दौरान हवाई हमलों मे जो बम गिराये गये उनमें से कुछ बम होण्डा की Factory पर गिर गये और होण्डा की Factory नष्ट हो गई। इस घटना ने होण्डा को हिलाकर रख दिया, फिर भी होण्डा ने हार नहीं मान और Factory के बचे कुचे मलबे को उन्होने 450000 येन में बेचकर कुछ राशि इकठा की।

जब दुसरा विश्व युद्ध समाप्त हुआ तो जापान में काफी तकलीफे बड़ गई। खाने पीने की Problem के साथ-साथ लोगो को आने जाने के लिए पैदल या साईकिल की मदद से दुरी तय करनी होती थी। इसी का तोड़ निकालते हुए होण्डा ने एक छोटा इंजन बनाकर उसे साईकिल से जोड़कर दिया।

बस फिर क्या था होण्डा का Idea सबको पंसद आया साथ ही इसकी किमत भी काफी कम थी और देखते ही देखते यह कंपनी 1961 तक हर महिने 1 लाख मोटरसाईकिल बनाने लगी और 1968 तक आते-आते 10 लाख मोटरसाईकिल बनाने लगी। इसके बाद होण्डा ने कारों में अपना हाथ आजमाया और यहा भी सफलता हासिल की और बहुत से सफल Model आज भी बाजार में चल रहे है। आज होण्डा मोटर साईकिल क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी कंपनी है और पुरी दुनिया में होण्डा की Two Wheeler पंसद की जाती है।

इसके बाद होण्डा ने अपने हाथ Four Wheeler में भी आजमाया और यह निर्णय भी उनका सही साबित हुआ और आज होण्डा टू-व्हीलर के साथ-साथ Four Wheeler में भी एक सफल कंपनी है जो समय-समय पर पुरी दुनिया में अपने नये-नये Model लांच करती है और उनकी बिक्री भी काफी ज्यादा है। होण्डा की सफलता का एक और कारण यह है कि सोईचिरों छोटे से लेकर बड़े तक को सम्मान देते थे और मजदूरों के साथ मिलकर काम किया करते थे।

लेकिन 5 अगस्त 1991 में सोइचिरों की मौत हुई। लेकिन आज भी होण्डा कंपनी जापान के अलावा पुरी दुनिया में सफल रूप से चल रही है। और पुरे विश्व पर कब्जा जमाये बैठी है।

दोस्तों आप भी अपने जीवन होण्डा की इस कहानी से कभी ना हार मानने वाली सोच को विकसित कर सकते है और अपने जीवन में सफलता को हासिल कर सकते हैं। मुझे उम्मीद है कि इस कहानी से Life Change होगी।

No comments